Wednesday, March 9, 2011

कभी थी मिलने की तमन्ना आपसे



आज न जाने क्यों आँखों में आँसू आ गया?
लिखते लिखते वो ख़्वाब याद आ गया?
कभी थी मिलने की तमन्ना आपसे...
न जाने क्यू ,आंसुओ में आपकी तस्वीर बन गयी.

हम तो मोहताज है आपकी एक दीदार के लिए



सौ बेवफ़ाई कबूल है एक वफ़ा के लिए,
सौ ऑंसू कबूल है एक हंसी के लिए,
हम तो मोहताज है आपकी एक दीदार के लिए,
सौ दुशमन कबूल है आपके प्यार के लिए !!

हम तोह दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं



गुनाह करके सजा से डरते है
ज़हर पी के दवा से डरते है
दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं
हम तोह दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं,

तुझे खोना भी मुश्कील है, तुझे पाना भी मुश्कील है !

तुझे खोना भी मुश्कील है, तुझे पाना भी मुश्कील है. जरा सी बात पर आंखें भीगो के बैठ जाते हो, तुझे अब अपने दील का हाल बताना भी मुश्किल है...